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योगी सरकार को बड़ा झटका, अति पिछड़ों को अनुसूचित जाति में शामिल करने पर केंद्र सरकार को आपत्ति

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर प्रदेश की योगी सरकार को केंद्र सरकार जोरदार झटका दी है। केंद्र सरकार ने अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। कयास लगाया जा रहा है कि केंद्र सरकार की इस आपत्ति के बाद योगी सरकार अपना फैसला वापस ले सकती है।

प्रदेश की योगी सरकार हाल ही में कुल 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूसित जाति की श्रेणी में रखने का निर्णय ली थी। इसके लिए शासनादेश भी जारी कर दिया गया था। इसी बीच मीडिया में आई खबर के मुताबिक लोकसभा में मंगलवार को केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि किसी जाति को किसी अन्य जाति के वर्ग में डालने का काम संसद का है। अगर यूपी सरकार ने इन जातियों को अतिपिछड़े से अनुसूचित जाति में लाना चाहती है तो इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया है। 

राज्य सरकार ऐसा कोई प्रस्ताव भेजेगी तो केंद्र सरकार उस पर विचार करेंगे, लेकिन इसके पहले उत्तर प्रदेश सरकार का फैसला गलत है। अगर कोई कोर्ट में चला गया तो उस फैसले पर रोक लग सकती है। योगी सरकार के फैसले के तहत अति पिछड़ी जाति कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोडिया, मांझी व मछुआ को अनुसूचित जाति में डाला गया है।

मालूम हो कि प्रदेश की पूर्ववर्ती सपा सरकार ने भी अति पिछड़ी 17 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का आदेश जारी की थी, लेकिन उसके खिलाफ डॉ. बीआर आंबेडकर ग्रंथालय एवं जनकल्याण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उस पर हाईकोर्ट अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी थी। उसके बाद 29 मार्च, 2017 को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार के इस फैसले के तहत कोई भी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाता है, तो वह कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन होगा।

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