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गाजीपुर: मुख्तार के बहनोई एजाजुल हक रिहा, कृष्णानंद हत्याकांड में बरी होने पर 14 साल बाद जेल से मिली मुक्ति

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर कृष्णानंद राय हत्याकांड में सीबीआई कोर्ट से बेकसूर साबित होने के बाद मऊ विधायक मुख्तार अंसारी के बहनोई और मुहम्मदाबाद नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन एजाजुल हक अंसारी करीब 14 साल बाद गाजीपुर जेल से रिहा हुए। शुक्रवार की सुबह करीब सवा नौ बजे वह जेल से बाहर निकले। उसके बाद जेल गेट पर मौजूद उनके परिवारीजन उन्हें लेकर घर यूसुफपुर के लिए रवाना हो गए।

मालूम हो कि 29 नवंबर 2005 को भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की भांवरकोल थाने की बसनिया चट्टी के पास हत्या हुई थी। उस हमले में कृष्णानंद के सरकारी अंगरक्षक तथा चालक सहित अन्य छह लोग भी मारे गए थे। घटना की एफआईआर कृष्णानंद के भाई रामनारायण राय ने दर्ज कराई थी। उसमें उन्होंने मऊ विधायक मुख्तार अंसारी तथा उनके सांसद भाई अफजाल अंसारी के अलावा बहनोई एजाजुलहक अंसारी, माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी आदि को नामजद किया था। एफआईआर के मुताबिक मुन्ना बजरंगी के साथ एजाजुल भी एके-47 लेकर मौके पर मौजूद थे और भाजपा विधायक कृष्णानंद तथा उनकी गाड़ी में रहे अन्य लोगों पर गोलियां दागे थे। घटना के तीसरे दिन एजाजुल कोर्ट में सरेंडर किए थे। तब से वह जेल में थे। हालांकि जेल प्रवास में उनकी तबीयत बिगड़ी और कोर्ट के आदेश पर उनकी इलाज एसपीजीआई लखनऊ में चला। जेल में रहते वह एक बार मुहम्दाबाद नगर पालिका चेयरमैन का चुनाव भी जीते थे।

कृष्णानंद हत्याकांड में सीबीआई कोर्ट का फैसला आने के बाद मुख्तार के भी जेल से बाहर आने को लेकर अटकलें शुरू हो गईं हैं। फिलफाल वह पंजाब की रोपड़ जेल में निरुद्ध हैं। लोकसभा चुनाव से पहले किसी व्यापारी से दस करोड़ की रंगदारी मांगने के कथित मामले में पंजाब पुलिस वारंट बी तामिल करा कर यूपी की बांदा जेल में बंद रहे मुख्तार को अपने साथ ले गई थी। बताया जा रहा है कि कृष्णानंद हत्याकांड में बेकसूर साबित होने से पहले ही मुख्तार अन्य मामलों में संबंधित अदालतों से बरी हो चुके हैं या उन्हें जमानत मिल चुकी है। इस दशा में हैरानी नहीं कि मुख्तार भी जल्द ही जेल से बाहर आ जाएं। वह कृष्णानंद हत्याकांड से पहले 25 अक्टूबर 2005 को किसी पूर्व मामले में कोर्ट में सरेंडर कर जेल चले गए थे। उसके बाद से वह जेल में ही हैं, जबकि कृष्णानंद हत्याकांड में मुख्तार के सांसद भाई अफजाल अंसारी को साल 2009 में ही इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की पिछले साल नौ जुलाई को बागपत जेल में हत्या हो गई थी।
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