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गुरुवार, 12 सितंबर 2019

गाजीपुर: कृषि विज्ञान केंद्र पीजी कालेज में वेबकास्ट के माध्यम से पशुजन्य रोगों के प्रति किया सचेत

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर कृषि विज्ञान केंद्र पीजी कालेज में राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी) के तहत 'गाय व भैंसों का महत्वपूर्ण प्रजनन रोग और मानव में पशुजन्य रोग, खुरपका और मुंहपका रोग' के बारे में वेबकास्ट के माध्यम से किसानों को दिखाया गया। कार्यक्रम की लाचिग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मथुरा से की। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के सीधा प्रसारण के दौरान केंद्र के सीनियर साइंटिस्ट एंड हेड डा. दिनेश सिंह ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खुरपका और मुंहपका रोग का टीकाकरण से नियंत्रण किया जाना है। हमारे जनपद के लगभग 60 से 70 फीसद पशुपालक इस रोग से ग्रसित हैं।

केंद्र के पशुचिकित्सा वैज्ञानिक डा. धर्म प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि ब्रूसेलोसिस गाय व भैंसों का महत्वपूर्ण प्रजनन रोग है, जो उनसे मनुष्यों में भी होता है। पशु इस रोग से ग्रसित है तो गर्भकाल के अंतिम तिमाही में गर्भपात, गर्भनाल (जेर) का रुकना व कमजोर बछड़े पैदा होते हैं। यदि यह रोग सांड़ में होता है तो उसमें मुख्य रूप से अंडकोष में सूजन पाया जाता है। यदि यह रोग पशुओं से मनुष्य में फैलता है तो उसमें संक्रमित मनुष्य को बुखार आना, रात को अधिक पसीना होना, शरीर में दर्द, भूख में कमी, वजन में कमी तथा बांझपन आ सकता है। मुख्य रूप से संक्रमित पशु के कुछ सामग्री जैसे गर्भनाल, गर्भपात, भ्रूण, संक्रमित पशु का दूध, खून व वीर्य के संपर्क में आने से फैलता है। 

इस रोग से बचाव के लिए चार से आठ माह की बछिया व बछड़ों का टीकाकरण किसान अवश्य कराएं। ठीक इसी तरह खुरपका व मुंहपका विषाणु जनित रोग है, जिससे ग्रसित पशु के मुंह व जीभ में घाव हो जाता है। अत्यधिक लार गिरता है। पशु के पैरों में घाव होने के कारण लगड़ाकर चलता है। इस रोग से ग्रसित पशु यदि स्वस्थ पशु के आहार पानी तथा अन्य चीजों के संपर्क में आता है तो स्वस्थ पशु को बुखार, वजन में कमी, गर्भपात व बाझपन हो सकता है। प्रत्येक छह माह के अंतराल पर पशुओं को इस रोग का टीकाकरण अवश्य कराएं। अंत में पशुओं का टीकाकरण किया गया। इस मौके पर केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक ओंकार सिंह, पशु चिकित्साधिकारी डा. दिलीप कुमार, सदर विधायक प्रतिनिधि अरविद कुमार ने भी किसानों को संबोधित किया। वेबकास्ट कार्यक्रम में 125 किसानों ने भाग लिया।

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