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गाजीपुर: बालू माफियाओं के खिलाफ भाजपा नेता योगेश की मुहिम में पार्टी के बड़े नेता भी आए साथ

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर जर्जर होते जा रहे गंगा के वीर अब्दुल हमीद पुल को बचाने के लिए बालू माफियाओं के खिलाफ भाजपा के युवा नेता योगेश सिंह की मुहिम में पार्टी के बड़े नेता भी साथ आ गए हैं। सोमवार को श्री सिंह पार्टी के प्रदेश मंत्री रामतेज पांडेय, जितेंद्र नाथ पांडेय को लेकर डीएम के बालाजी से मिले।

उन्होंने इस मामले में एसडीएम जमानियां रमेश मौर्य की कार्रवाई पर असंतोष जताया। बताए कि बालू माफिया अपनी कमाई के चक्कर में पुल को पूरी तरह ध्वस्त कराने पर आमादा हैं। वह पुल के रास्ते जिन ट्रैक्टर ट्रालियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन पर कार्रवाई के बजाए एसडीएम जमानियां ने बालू लदे ट्रकों का चालान कर खानापूर्ति कर दी, जबकि गंगा पार लाल बालू को ट्रक अनलोड कर देते हैं। उसके बाद खास तरीके से बनाई गई ट्रैक्टर ट्रालियों के जरिये वह बालू पुल के रास्ते इस पार लाया जाता है। उन ट्रैक्टर ट्रालियों पर 400 फीट तक बालू की ढुलाई होती है। पुल की जर्जर दशा को देख संबंधित इंजीनियर ओवर लोड वाहनों का परिचालन रोक दिए हैं। उसके लिए पुल के दोनों छोर पर बैरियर लगा दिए हैं, लेकिन इलाकाई पुलिस, खनन, संभागीय परिवहन विभाग की मिली भगत से उन ट्रैक्टर ट्रालियों से बालू की ढुलाई अनवरत जारी है। श्री सिंह ने अपनी बात की पुष्टि के लिए बालू ढुलाई में जुटे ट्रैक्टर ट्रालियों की वीडियो क्लिप भी पेश की।

बालू माफियाओं की गतिविधियों पर नजर रखने वालों की मानी जाए तो उन्हें भाजपा के ही कुछ नेताओं का संरक्षण हासिल है। अपने भाजपा कनेक्शन के चलते बालू और खनन माफिया काफी ताकतवर हो गए हैं। उनकी ताकत को हाल ही में हुए सीओ जमानियां कुलभूषण ओझा के तबादले से भी जोड़ कर देखा गया। इस दशा में भाजपा के युवा नेता योगेश सिंह की मुहिम का क्या नतीजा निकलेगा यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन यह तय हो गया है कि उनकी मुहिम में जुड़ आए भाजपा के बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा भी दाव पर लग गई है। यह बड़े नेता केंद्रीय मंत्री डॉ.महेंद्र नाथ पांडेय के बेहद करीब माने जाते हैं। तब यह भी हैरानी नहीं कि डॉ.पांडेय को आखिर में दखल देना पड़े।

हालांकि इस सिलसिले में गाजीपुर न्यूज़ टीम से चर्चा पर योगेश सिंह ने कहा कि इस मुद्दे को भाजपा नेताओं की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखने की बात बेमानी है। बात भाजपा की जनता के प्रति जिम्मेदारी और जवाबदेयी की है। फिर यह मुद्दा सरकार के राजस्व के नुकसान का भी है। गंगा पुल के ध्वस्त होने का मतलब गंगा पार आबाद लाखों लोगों के सामने विकट स्थिति का आना और यह पुल तभी सलामत रहेगा, जब इंजीनियरों के तय मानक भार में उस पर मालवाहक वाहनों का आवागमन सुनिश्चित होगा। श्री सिंह ने कहा कि गंगा पुल की सलामती को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं पर आमजन का दबाव है और इन कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान के लिए जरूरत पड़ी तो वह गंगा पुल पर बेमियादी धरना पर बैठने से भी पीछे नहीं हटेंगे। बताए कि बालू माफिया खनिज और परिवहन शुल्क के रूप में सरकारी राजस्व को भी चूना लगा रहे हैं।

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