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गाजीपुर: मैडम को विद्यालय में पंजीकृत बच्चों की संख्या तक पता नहीं

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर सरकार एक तरफ विद्यालय को मॉडल बनाने के साथ उसमें अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई शुरू करा रही है तो दूसरी तरफ जिस विद्यालय में एक भी बच्चे नहीं पढ़ने आते हैं वहां प्रधानाध्यापक, शिक्षामित्र, रसोइयां व चपरासी नियुक्त कर उन्हें भारी भरकम वेतन भी दे रही है। ऐसा ही हाल है नगर के मियापुरा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय की। हैरत वाली बात तो यह है कि मौके पर मिली शिक्षामित्र रमा उपाध्याय से जब बच्चों के नहीं आने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बाढ़ की छुट्टी चल रही है। पंजीकृत बच्चों की संख्या पूछने पर बताया कि रजिस्टर आलमारी में बंद है। मेरी तैनाती अगस्त माह में हुई है मैं नहीं जानती कितने बच्चे पंजीकृत हैं।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय मियापुरा पर शुक्रवार की दोपहर करीब 12 बजे शिक्षामित्र कुर्सी पर तो रसोइयां व एक महिला चपरासी पर जमीन पर बैठकर गप लड़ा रहीं थीं। गंगा किनारे स्थित इस विद्यालय पर अचानक जागरण टीम को देखकर मैडम हैरान हो गईं। सुनसान विद्यालय देखकर टीम ने इसका कारण पूछा तो मैडम ने जवाब दिया कि आपको नहीं पता है बाढ़ की छुट्टी चल रही थी। पंजीकृत बच्चों की संख्या पूछने पर मैडल गुस्से में भी आ गईं। जवाब दिया कि रजिस्टर आलमारी में बंद हैं। मेरी तैनाती अगस्त माह में हुई। मैं नहीं जानती हूं। उपाध्याय जी इसके इंचार्ज हैं वही बताएंगे। 

अभी वो कुछ बोलतीं तब तक महिला अनुचर ने बताया कि इससे पहले किसी की तैनाती नहीं हुई थी इसलिए बच्चे नहीं आते थे। बहिन जी आ गईं हैं, अब बच्चों को स्कूल लाया जाएगा। टेलीफोन पर प्रधानाध्यापक अरविद उपाध्याय ने बताया कि कागज में तो करीब 25-30 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन चार-पांच बच्चे ही आते हैं। जब कुछ वितरण होता है तो बच्चे आ जाते हैं और फिर आते ही नहीं। इससे पहले इस भवन में बालिका विद्यालय चलता था। राम भरोसे ही यह विद्यालय चल रहा है। अब प्रधानाध्यापक ही कह रहे हैं कि विद्यालय राम भरोसे चल रहा है तो आप अंदाजा भी लगा सकते हैं कि इस समय जिले की शिक्षा व्यवस्था क्या है।

भवन देखकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे
विद्यालय का भवन सैकड़ों वर्ष पुराना है। भवन तो काफी बड़ा है, लेकिन इतना जर्जर हो गया है कि इसे देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। छत की पटिया बीच से टूट आधा लटकी हुई है तो वहीं गाटर भी बीच से टूटकर किसी तरह अटका हुआ है। इतनी जर्जर स्थिति के बावजूद यहां विद्यालय संचालित हो रहा है और संबंधित महकमा आंख मूंदे हुए है। फर्श पर काई जम गया है। आलम यह है कि अगर थोड़ा भी तेज चले तो फिसलना तय है।

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