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बिना लक्षणों वाले कोरोना मरीज अब सात दिन में होंगे डिस्चार्ज

गाजीपुर न्यूज़ टीम, लखनऊ। बिना लक्षणों वाले कोरोना मरीजों को अब सात दिन में ही कोविड अस्पतालों से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। ऐसे मरीजों को एसिम्पटोमैटिक या माइल्ड पेशेंट भी कहा जाता है। इनमें कोरोना संक्रमण होने के बाद भी कोई विशेष लक्षण नहीं आते हैं। यह सामान्य रूप से रहते हैं और इनके स्वास्थ्य में कोई गिरावट महसूस नहीं होती। देश में ऐसे मरीजों की संख्या करीब 80 फीसद तक है। 

अब इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च(आइसीएमआर) ने बिना लक्षणों वाले सभी मरीजों की सातवें दिन ही कोरोना जांच कराकर रिपोर्ट निगेटिव होने पर उन्हें घर भेजने का निर्देश दिया है। जिसकी रिपोर्ट सात दिन में निगेटिव नहीं आती है तो उसे अधिकतम 10 दिन तक रखा जाएगा। उसके बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।

इस बाबत देश भर के चिकित्सा संस्थानों को नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। लखनऊ के लोहिया संस्थान, केजीएमयू, एसजीपीजीआइ समेत सभी कोविड अस्पतालों को भी निर्देश मिल चुका है। पालन पर अमल करना भी शुरू कर दिया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि सरकार के आदेश से सभी कोविड अस्पतालों को अवगत करा दिया गया है। 

शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी स्वस्थ होंगे मरीज
लोहिया संस्थान के अपर चिकित्सा अधीक्षक व प्रवक्ता डॉक्टर श्रीकेश सिंह कहते हैं कि अभी तक भर्ती करने के 12 दिन बाद ही मरीज की दोबारा जांच कराने का नियम था। ऐसे में अगर कोई मरीज पहले भी ठीक हो रहा हो तो उसका पता ही नहीं चल पाता था। अब यह नियम आने से सात दिन में जांच कराकर जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आती है उन्हें छुट्टी दी जा सकेगी। 

एक हफ्ते में बन जाती है एंटीबॉडी
डॉ. श्रीकेश सिंह के अनुसार बिना लक्षणों वाले मरीज (एसिम्पोटोमैटिक) की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। ऐसे में संक्रमित होने के एक हफ्ते में उनमें एंटीबॉडी लगभग बन जाती है। ऐसे में ज्यादातर मरीजों की रिपोर्ट एक हफ्ते में निगेटिव आ सकती है। इससे डिस्चार्ज करने में कोई मुश्किल नहीं होनी चाहिए। 

होम आइसोलेशन में रहने से दिक्कत नहीं
बीकेटी स्थित रामसागर मिश्र अस्पताल से 135 कोरोना मरीजों को अब तक डिस्चार्ज कर चुके डॉक्टर रोहित सिंह कहते हैं कि यह सरकार का अच्छा फैसला है। मेरे विचार से बिना लक्षणों वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में भी रखे जाने से कोई दिक्कत नहीं है। सिर्फ मॉडरेट व सीवियर मरीजों को ही कोविड अस्पतालों में रखा जाना चाहिए।