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ताल उलगने लगा बेशकीमती लकडि़यां, जंगल माफियाओं की करतूत का ऐसे हुआ खुलासा

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गोरखपुर। गोरखपुर वन प्रभाग के कैम्पियरगंज रेंज का सरुआताल गुरुवार सुबह से जंगल की कीमती लकड़ियां उगल रहा है। अब तक 10 बोटा साखू एवं सागौन की लकड़ियां निकाली जा चुकी हैं। स्वयं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यह सिलसिला अगले तीन चार दिन तक चलेगा। फिलहाल गुरुवार की रात स्टीमर पर हथियारबंद वनकर्मी सरुआताल एवं परगापुरताल में गश्त करते रहे। स्थानीय पुलिस को वन माफियाओं की सक्रियता के चलते वन विभाग ने अलर्ट कर दिया है।
बुधवार की रात सरुआताल और परगापुरताल में स्टीमर पर गश्‍त करने वाली पेट्रोलिंग टीम को ताल में छुपाकर रखी गई लकड़ियों की जानकारी मिली। डीएफओ अविनाश कुमार ने फरेंदा रेंजर विजय कुमार श्रीवास्तव और कैम्पियरगंज रेंजर साजिद अली की टीम गठित कर सभी स्टॉफ के साथ कॉम्बिंग का निर्देश दिया। निगरानी के लिए एसडीओ एसएन मौर्या की ड्यूटी लगाई गई। 15 स्टाफ और 30 वन मजदूरों एवं गोताखोरों के साथ कॉम्बिंग के दौरान तकरीबन 30 साखू व सागौन के बोटे जिन्हें काटकर सरुआताल की तलहटी में छुपाया गया था, ढूंढ निकाला। गुरुवार की शाम तक तकरीबन 10 बोटे निकाल लिए गए। यह सिलसिला अभी कई दिन जारी रहेगा।

वन माफियाओं के लिए मुफीद रहा है परगापुर और सरुआताल
कैम्पियरगंज वन रेंज में 264 हेक्टेयर का सरुआताल बाढ़ के दिनों में बाढ़ के पानी से लबालब भर जाता है। जलभराव के कारण यह 69 हेक्टेयर के वन विभाग के परगापुर ताल से जा मिलता है। इन दोनों ताल के साथ फरेंदा एवं कैम्पियरगंज का जंगल सटा हुआ है। इसलिए बाढ़ के दिनों में वन माफियाओं की चांदी हो जाती है। वे रास्त में पेड़ काट कर ताल में डूबे देते हैं, बाद में अपनी सुविधानुसार निकाल ले जाते हैं।
10 गिरोह सक्रिय हैं कैम्पियरगंज और फरेंदा वन रेंज में
सरुआताल और परगापुरताल क्षेत्र में कैम्पियरगंज और फरेंदा वन रेंज के तकरीबन 10 वन तस्करों के गिरोह सक्रिय हैं। कई बार इन गिरोहों के बीच भी पेड़ों को लेकर जंग छिड़ जाती है। विभाग ने इन गिरोह के लोगों के खिलाफ कैम्पियरगंज और फरेंदा पुलिस थाने में भी एफआईआर दर्ज कराया है लेकिन सख्त कार्रवाई के अभाव में इनके हौसले बुंदल हैं। गुरुवार को कार्रवाई के दौरान भी इनके गुर्गे वन विभाग के मजदूरों को धमकाते दिखे लेकिन रेंजर और वन दरोगा के समक्ष उनकी एक न चली।

डीएफओ बोले 
बाढ़ के सीजन के वन माफिया दोनों ताल में ज्यादा सक्रिय रहते हैं। कई बार वनकर्मियों पर उस क्षेत्र में हमला भी हुआ। गुरुवार से ताल में सर्च अभियान चला रहा है। अब तक 10 बोटा लकड़ियां बरामद की गई हैं। यह सिलसिला तीन चार दिन जारी रहने की उम्मीद है। स्टीमर की मदद से दिन रात ताल में निगरानी रखी जा रही है।-अविनाश कुमार, डीएफओ
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