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मुख्तार अंसारी 15 वर्षों से जेल से ही जीतता रहा चुनाव और चलाता रहा आपराधिक साम्राज्य

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर/मऊ. मायावती ने जेल में बंद विधायक मुख्तार अंसारी की जगह बसपा प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर को मऊ की सदर सीट से टिकट देने का शुक्रवार को एलान किया है। इसको लेकर जिले की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। हालांकि भीम राजभर को पहले भी मायावती ने विधानसभा का चुनाव मऊ की सदर सीट से लड़वाया था लेकिन उस समय इनका प्रतिद्वन्दी कौएद का प्रत्याशी मुख्तार रहा। मुख्तार ने भीम राजभर को कड़ी टक्कर देते हुए पराजित कर दिया था। वैसे इस समय बसपा से मौजूदा विधायक मुख्तार का टिकट काट मायावती ने पुन: भीम राजभर के नाम की घोषणा कर मऊ जिले में राजभर कार्ड फेंका है जिसके परिणाम को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

डॉन मुख्तार अंसारी

बता दें कि 1995 में जेल से छूटने के बाद गाजीपुर जनपद के युसुफपुर मुहम्मदाबाद निवासी मुख्तार अंसारी ने मऊ में अड्डा जमाया। बहुजन समाज पार्टी में शामिल होने के साथ ही मऊ में बड़ी रैली निकाल ताकत का एहसास कराकर एक वर्ष बाद 1996 में विधायक बन बैठा। फिर 2002 में निर्दलीय विधायक चुने जाने के तीन वर्ष बाद यानि 2005 में मऊ जनपद महीनों तक दंगे की आग में जलता रहा। 

इसके छीटें मुख्तार अंसारी पर भी पड़े परंतु इसको चाहने वालों की तादाद लंबी होती गई। इसके बाद 2007, 2012 तथा 2017 में लगातार मुख्तार अंसारी बसपा के बैनर पर विधायक चुना गया। 

2005 में गाजीपुर के मुहम्मदाबाद विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड के बाद से अब तक जेल में बंद मुख्तार अंसारी लगातार जेल से जहां चुनाव जीतता रहा और अपने आपराधिक तंत्र को भी चलाता रहा। अब बसपा मुखिया मायावती ने अपराधियों से तौबा करते हुए मुख्तार अंसारी को आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में टिकट देने से मना कर दिया है।

कभी निर्दल तो कभी राजनीतिक गठजोड़ से हासिल की जीत

2005 में दंगे के आरोप में जेल में निरुद्ध होने के बाद भी मुख्तार अंसारी कभी निर्दल तो कभी राजनीति दलों के गठजोड़ से चुनाव जीतता गया। ठेकों में कमीशन को लेकर 29 अगस्त 2009 को जनपद के बड़े ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना की मुख्तार के शूटरों ने गाजीपुर तिराहे पर दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। 

रक्तरंजित सिलसिला यही नहीं रूका। इस हत्याकांड के गवाह रामसिंह मौर्या व उनके सुरक्षा में तैनात सिपाही सतीश कुमार की 19 मार्च 2010 को दक्षिणटोला थाना क्षेत्र में स्थित परिवहन कार्यालय के सामने दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसमें मुख्तार का नाम सामने आया। मन्ना हत्याकांड में मुख्तार गवाही के अभाव में बरी हो गया। हालांकि इससे पहले हाई प्रोफाइल वाराणसी निवासी कोयला व्यवसायी नंदकिशोर रूंगटा व दिल्ली के व्यवसायी विजय गाेयल की फिरौती लेकर हत्या करने का आरोप मुख्तार अंसारी पर लगा था। 

बड़े आपराधिक कारनामों के बावजूद मुख्तार अंसारी ने राजनीति की पिच पर भी कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1996 से शुरू हुआ राजनीतिक सिलसिला आज तक चल रहा है। अब बसपा मुखिया द्वारा टिकट नहीं देने के एलान के बाद नए ठौर पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

भीम राजभर ने 2007 में मुख्तार अंसारी को दी थी कड़ी टक्कर

मऊ सदर विधानसभा सीट पर मुस्लिमों के निर्णायक होने के बावजूद बसपा के प्रत्याशी रहे भीम राजभर ने करीबी लड़ाई लड़ी थी। 2012 में सदर सीट पर कुल 20 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाया था। मुख्तार अंसारी ने कौमी एकता दल से चुनाव लड़ते हुए 70,210 वोट हासिल किया जबकि बसपा के भीम राजभर को 64,306 वोट और सपा के अल्ताफ अंसारी 54,216 वोट मिला था। बीजेपी को यहां 10 हजार वोट भी नहीं मिल सका था।

सेना की नौकरी नहीं आई रास, दे दिया था त्यागपत्र

बसपा प्रदेश अध्यक्ष व सदर विधान सभा प्रत्याशी भीम राजभर मऊ के कोपागंज ब्लाक के मोहम्मदपुर बाबूपुर गांव के निवासी हैं। इनके पिता रामबली राजभर कोल फील्ड में नौकरी करते थे ये अपने परिवार के एकलौते कर्ता-धर्ता है इनकी मात्र एक बहन है। एमए की पढ़ाई करने के बाद ये सेना में भर्ती हो गए। छत्तीसगढ़ में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद पहली पोस्टिंग मे ही नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। 

सन 1995 में नेहरु युवा केंद्र से जुड़ कर काम करने लगे। उसी दौरान इन्होंने अपने गांव में शहीद मुन्ना राजभर की प्रतिमा की स्थापना कराई और उनकी पुण्यतिथि पर लोक कलाओं को बढ़ावा देने के लिए लोक रंग महोत्सव का आयोजन करते रहे। सन 1998 में बहुजन समाज पार्टी से जुड़े। 

पार्टी में धीरे-धीरे ऊंचाइयां चढ़ते गए और सन 2000 में बसपा की सरकार में इन्हें पहली बार जिलाध्यक्ष बनाया। इसके बाद कई बार अध्यक्ष बने और 2012 में पार्टी के टिकट पर सदर विधान सभा का चुनाव लड़े और मुख्तार से हार गए। इसके बाद इस वर्ष उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने के साथ ही पार्टी ने पुन: सदर विधान सभा का प्रत्याशी बनाया है।

पार्टी के इस निर्णय से कार्यकर्ता और दोगुने उत्साह से कार्य करेंगे

पार्टी की मुखिया के निर्णय से स्वागत योग्य है कि उन्हों ने एक बूथ स्तर के कार्यकर्ता को पहले भी विधान सभा का टिकट दिया और बाद में प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व देकर मान बढ़ाया है। पार्टी के इस निर्णय से कार्यकर्ता और दोगुने उत्साह से कार्य करेंगे।-हरिश्चंद्र गौतम, मुख्य सेक्टर प्रभारी ,बहुजन समाज पार्टी आजमगढ़ मंडल।

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