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देहरादून में गिरफ्तार IAS रामविलास यादव ने गाजीपुर के पैतृक गांव परेवा में बनाया अकूत संपत्ति का साम्राज्य

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. देहरादून में आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार आइएएस रामबिलास यादव ने पैतृक गांव शादियाबाद के परेंवा में अकूत संपत्ति का साम्राज्य बनाया है। करीब तीन बीघे में न सिर्फ आलीशान कोठी बनाई है, बल्कि अंदर पार्क व लाइब्रेरी भी है। दो आसपास की जमीनें खरीदकर दाम बढ़ा दिए हैं।

परेंवा में रामबिलास यादव ने करीब तीन बीघे में मकान बना रखा है। सभी सुख सुविधाओं से सुसज्जित इस कोठी में किसी को आने-जाने की अनुमति नहीं है। यूपी में तैनाती के समय उनका यहां काफी आना-जाना रहा था। देहरादून में तैनाती के बाद से उनका यहां आना कम हो गया है। मुख्यद्वार के अलावा अंदर भी गेट लगा हुआ है, ताकि कोई बाहरी व्यक्ति अंदर तक प्रवेश न कर सके। आइएएस ने मुख्य सड़क पर दुकानें बनवा रखी हैं। इसके अलावा काफी जमीनें भी खरीद रखी है।

ग्रामीणों का यहां तक कहना है कि उन्होंने क्षेत्र में जमीन के दाम बढ़ा दिए हैं। जमीन बिक्री की भनक मिलने पर वह अधिक दाम देकर खरीद लेते थे। कोठी वाली जमीन कुछ फेरबदल कर ली है और बाकी खरीदी है। अब घर की देखभाल उनके पट्टीदार शशिकांत यादव करते हैं। हालांकी शशिकांत यादव का कहना है कि वह सिर्फ घर की देखभाल करते हैं बाकी वह कुछ नहीं जानते हैं।

बीते 11 जून को आइएएस अधिकारी रामबिलास यादव के देहरादून व लखनऊ के अलावा जिले के परेंवा के पैतृक आवास पर उत्तराखंड विजिलेंस की टीम ने छापेमारी कर जांच की थी। कई घंटे की छानबीन के बाद टीम रिपोर्ट तैयार कर ले गई थी। सपा सरकार में लखनऊ विकास प्राधिकरण के सचिव और एडिशन डायरेक्टर मंडी परिषद भी रह चुके हैं। तत्कालीन सपा सरकार के करीबी अफसरों में शामिल रहे रामबिलास यादव कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे। प्रदेश में योगी सरकार के आते ही वह 2019 में अपने मूल कैडर उत्तराखंड लौट गए थे।

आइएएस ने बंगले में किया सरकारी पंचायत भवन को ‘कैद’

सत्ता की रसूख का अंदाजा इसी से लगाया सकता है कि उन्होंने तत्कालीन जनप्रतिनिधियों से मिलीभगत कर पंचायत भवन भी अपने आवास के भीतर बनवा लिया और उस पर खुद का कब्जा है। हमेशा गेट बंद रहने से कोई भी ग्रामीण पंचायत भवन में नहीं जा सकता है। यहां तक कि ग्राम पंचायत की बैठक भी उसमें नहीं होती है। आइएएस होने के कारण कोई भी पंचायत भवन को कब्जा मुक्त कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। यहां तक कि ब्लाक के अधिकारी पंचायत भवन आइएएस की कोठी में कैद होने से अनजान बने रहे। डीएम मंगला प्रसाद सिंह का कहना है कि वह इस प्रकरण की जांच कर कार्रवाई करेंगे।

IAS रामविलास यादव

देर होने पर नाई को खरीदकर दे दी थी बाइक

आइएएस रामबिलास यादव यूपी में तैनाती के दौरान अक्सर गांव आते थे। यहां बकायदा दरबार लगता था। मिलने वालों की लंबी लाइनें होती थी। उनके लिए नाई व धोबी लगाए गए थे। एक बार उन्होंने घर पर ही बाल कटिंग के लिए शादियाबाद से नाई को बुलवाया। नाई साइकिल से पहुंचा तो देर हो गई। वह बैठकर उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे। देर होने का कारण पूछा तो नाई ने बताया कि साइकिल में कुछ खराबी आ गई थी। इसके बाद उन्होंने नाई को नई बाइक खरीद कर दे दी थी। उस समय इसकी काफी चर्चा रही।

शादी के दो साल बाद ही पहली पत्नी गिरिजा देवी से तोड़ लिया था नाता

आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार शादियाबाद के गांव परेंवा निवासी आइएएस रामबिलास यादव ने शादी के दो साल बाद से पहली पत्नी से नाता तोड़ लिया था। आज तक वह एकाकी जीवन जीने को विवश है। बावजूद इसके वह पति धर्म का पालन करते हुए मांग में सिंदूर लगाती है और अपने सुहाग की रक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं।

अब वह बेटी इंदू पत्नी अनिल यादव के साथ वाराणसी के हनुमान मंदिर के पीछे कालोनी में रहतीं हैं। बहरियाबाद क्षेत्र के राजापुर गांव की रहने वाली गिरिजा देवी की शादी सन् 1975-76 में कम उम्र में शादियाबाद के परेवा निवासी रामविलास यादव से हुई। गौना के दो-तीन वर्षों बाद एक पुत्री हुईं। पुत्री के जन्म के बाद से ही रामविलास ने पत्नी गिरिजा से दूरी बना ली। इस बीच नौकरी मिलने के बाद उन्होंने दूसरी शादी कर ली। दूसरी शादी करने के बावजूद गिरिजा देवी ससुराल परेवा में रहकर सास-ससुर की सेवा करती रहीं।

सास-ससुर व रामविलास यादव ने बेटी इंदू की शादी की। इसके बाद सास-ससुर की मौत होने पर वह अकेली डेढ़-दो वर्षों तक ससुराल में रहीं। तबीयत ठीक न रहने के कारण लगभग 7-8 वर्ष पूर्व वह अपनी बेटी के यहां बनारस चली गई। साल में एका-दो बार वह अपने मायके भी आती रहती है। भाई संजय यादव ने बताया कि पति-पत्नी में संबंध विच्छेद न हो इसके लिए बहुत प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनीं। बहन ने किस्मत में जो लिखा था उसे स्वीकार कर अपनी बेटी के साथ रह रहीं हैं।

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