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गाजीपुर में सरकारी विद्यालय में बार-बालाओं ने लगाए ठुमके, BSA ने कहा- होगी कड़ी कार्रवाई; FIR दर्ज

ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. गाजीपुर में स्कूल की छुट्टियों के बीच बार-बालाओं के डांस का वीडियो सामने आया है। सरकारी विद्यालय परिसर को रंग-बिरंगे पंडाल से सजाया गया। प्राथना मैदान में स्टेज लगाकर फिल्मी गानों को बार-बालाएं थिरकती दिखीं। इसके बाद से लोगों में नाराजगी है। लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जिसके बाद प्रिंसिपल की शिकायत पर पुलिस ने आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
बताया जा रहा है कि सरकारी विद्यालय परिसर में 28 मई को तेरहवीं कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें शोकाकुल परिवार ने आर्केस्ट्रा भी बुलाया था। इससे स्थानीय लोग और अभिभावक नाराज हो गए। उनका कहना है कि विद्यालय जैसे पवित्र स्थान पर ऐसा कार्यक्रम शिक्षा के माहौल के विपरीत है। लोगों ने इसे सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के खिलाफ बता दिया।

इसके बाद लोगों ने इस घटना का वीडियो रिकार्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जिसके बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बिना अनुमति विद्यालय का ताला तोड़कर कार्यक्रम आयोजित करने का विरोध किया। सूचना मिलने पर प्रधानाचार्य की शिकायत पर संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।

मामला शादियाबाद क्षेत्र के मनिहारी ब्लॉक के बसेवां स्थित आदर्श प्राथमिक विद्यालय का है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्टेज पर बार बलाएं डांस करते हुए दिख रहीं हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह कार्यक्रम एक परिवार में आयोजित तेरहवीं (मृत्यु भोज) के अवसर पर हुआ था। जिसके लिए बिना अनुमति विद्यालय का ताला तोड़कर कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

यह आर्केस्ट्रा कार्यक्रम एक स्थानीय प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में आयोजित किया गया था। हालांकि कार्यक्रम के आयोजन स्थल को लेकर स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने तीखी प्रतिक्रियाएं है। लोगों का कहना है कि विद्यालय शिक्षा का मंदिर होता है और ऐसे स्थानों पर इस प्रकार के मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित करना उसकी गरिमा और शैक्षणिक वातावरण के विपरीत है।

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस आयोजन को सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के विपरीत बताया है। उनका तर्क है कि शोक के माहौल वाले घर में ऐसे मनोरंजक कार्यक्रम समाज को गलत संदेश देते हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म की तेरही परंपरा में ऐसे आयोजनों का कोई स्थान नहीं है।

हालांकि, कुछ लोग इस आयोजन का समर्थन भी कर रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसे सामाजिक कार्यक्रम शोकाकुल परिवार को मानसिक तनाव और दुख से उबरने में मदद कर सकते हैं, जिसे एक प्रकार की 'सोशल थेरेपी' के रूप में देखा जाना चाहिए। इस मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के आयोजकों ने विद्यालय परिसर का ताला तोड़कर यह आयोजन किया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश (छुट्टियां) चल रहीं हैं। गांव के कुछ निवासियों ने स्कूल परिसर का ताला तोड़कर वहां तेरहवीं से जुड़ा एक कार्यक्रम आयोजित किया था। संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। साथ ही विभाग की ओर से इस मामले में आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।