गाजीपुर के समाजवादी पार्टी से बकैत सांसद अफजाल अंसारी पर तीसरी FIR, मुश्किलें बढ़ीं
ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. गाजीपुर पुलिस ने मुख्तार अंसारी गैंग (आईएस-191) से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों और हथियारों की जांच में बड़ी कार्रवाई की है। समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी, जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के तत्कालीन शस्त्र लिपिक गौरीशंकर लाल और शस्त्र लिपिक द्वितीय सुग्रीव तिवारी के खिलाफ सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह अफजाल अंसारी पर दर्ज होने वाला तीसरा मुकदमा है।
पुलिस का आरोप है कि आपराधिक षड्यंत्र के तहत शस्त्र लाइसेंस की मूल पत्रावली और क्रय-विक्रय से संबंधित अभिलेखों को अभिलेखागार से गायब करा दिया गया। इस कारण संबंधित हथियारों का भौतिक सत्यापन नहीं हो सका।
दर्ज प्रमुख मुकदमे
अफजाल अंसारी के खिलाफ शस्त्र लाइसेंस संख्या 1188/पी-11 की मूल पत्रावली और क्रय-विक्रय अभिलेख गायब कराने के आरोप में सदर कोतवाली में मुकदमा संख्या 554/26 दर्ज।
इससे पहले अफजाल अंसारी के खिलाफ दो अन्य मुकदमा रिवॉल्वर के भौतिक सत्यापन में अनियमितता और शस्त्र लाइसेंस से संबंधित पत्रावली गायब कराने के आरोप में दर्ज किया जा चुका है।
अफशां अंसारी के विरुद्ध भी शस्त्र लाइसेंस से संबंधित अभिलेखों में अनियमितता और सत्यापन में सहयोग न करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।
जांच के दौरान तत्कालीन शस्त्र लिपिकों की भूमिका सामने आने पर कई मामलों में पूर्व शस्त्र लिपिकों और अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
पुलिस के अनुसार आईएस-191 गैंग से जुड़े 51 शस्त्र लाइसेंसों पर खरीदे गए 145 हथियारों की जांच अभी जारी है। जांच में नए तथ्य मिलने पर अन्य मामलों में भी मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
जांच में कई हथियारों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है, जबकि कई मामलों में खरीद-बिक्री और अभिलेखों में अनियमितताएं सामने आई हैं। यह कार्रवाई इसी व्यापक जांच का हिस्सा है। पुलिस के अनुसार, अफजाल अंसारी के शस्त्र लाइसेंस संख्या 1188/पी-11 से संबंधित मूल पत्रावली और क्रय-विक्रय अभिलेख अभिलेखागार से गायब पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि इस लाइसेंस पर वर्षों पहले अरुणाचल प्रदेश के अलोंग जिले से एनपीबी राइफल संख्या 44667 का क्रय-विक्रय हुआ था, लेकिन संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
हथियारों का भौतिक सत्यापन नहीं हो सका अभिलेख न मिलने के कारण हथियार का भौतिक सत्यापन नहीं हो सका। पुलिस का आरोप है कि लाइसेंस धारक और तत्कालीन शस्त्र लिपिकों की मिलीभगत से ये रिकॉर्ड गायब कराए गए, जिससे हथियारों के दुरुपयोग की आशंका बनी रही। पुलिस ने बताया कि शेष शस्त्र लाइसेंसों और हथियारों की जांच जारी है और जहां भी अनियमितताएं मिलेंगी, वहां आगे भी मुकदमे दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
