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गाजीपुर के बरहपुर में राशन वितरण को लेकर हंगामा, SDM ज्योति चौरसिया के नाम का हवाला देने का आरोप!

ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. गाजीपुर जनपद के नंदगंज क्षेत्र के विकासखंड देवकली अंतर्गत ग्राम सभा बरहपुर में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पात्र राशन कार्डधारकों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न नहीं मिलने के साथ ही राशन वितरण की प्रक्रिया में भी कई तरह की अनियमितताएं दिखाई दे रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, बरहपुर के कोटेदार परवीन कुमार जायसवाल द्वारा राशन वितरण के दौरान लाभार्थियों से E-POS मशीन पर फिंगरप्रिंट लगवाया जाता है। आरोप है कि कई बार कार्डधारकों को पहले फिंगरप्रिंट लगाने के लिए कहा जाता है और राशन लेने के लिए शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच आने को कहा जाता है।

E-POS मशीन पर फिंगरप्रिंट और बाद में राशन लेने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि E-POS मशीन पर प्रक्रिया पूरी कराने के बाद उन्हें बाद में राशन लेने के लिए बुलाया जाता है। कार्डधारकों का कहना है कि राशन वितरण के समय उन्हें वास्तविक रूप से कितनी मात्रा दी जा रही है और रिकॉर्ड में कितनी मात्रा दर्ज की जा रही है, इसकी पूरी जानकारी हमेशा स्पष्ट नहीं रहती।

ग्रामीणों ने मांग की है कि E-POS मशीन में दर्ज वितरण रिकॉर्ड और वास्तविक रूप से लाभार्थियों को दिए गए राशन का मिलान कराया जाए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।

इलेक्ट्रॉनिक कांटे के बजाय मैनुअल तराजू से राशन तौलने का आरोप
राशन वितरण की तौल प्रक्रिया को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राशन वितरण के लिए इलेक्ट्रॉनिक कांटे की व्यवस्था होने के बावजूद कथित तौर पर राशन को मैनुअल कांटे/तराजू से तौला जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार, कई बार राशन के बोरे या अन्य सामान कांटे पर रखकर तौलने के बाद कार्डधारकों को खाद्यान्न दिया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस तरीके से राशन की वास्तविक मात्रा को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

ग्रामीणों ने मांग की है कि राशन वितरण के दौरान निर्धारित मानक के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन का इस्तेमाल किया जाए और प्रत्येक कार्डधारक को उसके हिस्से का खाद्यान्न स्पष्ट रूप से तौलकर दिया जाए।

कम राशन देने का भी आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मोबाइल फोन पर गेहूं और चावल की निर्धारित मात्रा मिलने का संदेश आने के बावजूद कुछ लाभार्थियों को कथित तौर पर कम राशन दिया जाता है। कुछ कार्डधारकों ने एक से दो किलो तक कम खाद्यान्न मिलने की शिकायत की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड में पूरी मात्रा दर्ज की जाती है तो लाभार्थियों को भी उतनी ही मात्रा में राशन मिलना चाहिए। उन्होंने दुकान के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और E-POS रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।

SDM सैदपुर के नाम का हवाला देने का आरोप
मामले में ग्रामीणों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कोटेदार परवीन कुमार जायसवाल द्वारा कथित तौर पर अपने प्रशासनिक संपर्कों का हवाला दिया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, SDM सैदपुर ज्योति चौरसिया से संपर्क होने की बात कहकर प्रभाव बनाने की कोशिश किए जाने का आरोप है।

ग्रामीणों का दावा है कि कथित तौर पर यह कहा जाता है कि प्रशासन में उसकी पहुंच है और उसका कोई कुछ नहीं कर सकता। ग्रामीणों ने ऐसे दावों की भी जांच कराने की मांग की है।

हालांकि, इन आरोपों से SDM ज्योति चौरसिया की किसी प्रकार की संलिप्तता स्वतः सिद्ध नहीं होती है। उनके नाम का उल्लेख ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप में कथित संपर्क के संदर्भ में किया गया है। इस संबंध में SDM या संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच के दौरान E-POS मशीन का रिकॉर्ड, राशन दुकान का स्टॉक, वितरण रजिस्टर, तौल की व्यवस्था और लाभार्थियों को वितरित वास्तविक मात्रा की जांच की जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि जांच में राशन वितरण में अनियमितता, निर्धारित मात्रा से कम खाद्यान्न देने या किसी अधिकारी के नाम का गलत इस्तेमाल कर लोगों पर दबाव बनाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए राशन वितरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और प्रत्येक पात्र लाभार्थी को उसके हिस्से का खाद्यान्न निर्धारित मात्रा में मिलना चाहिए।

स्थान: ग्राम सभा बरहपुर, नंदगंज क्षेत्र, विकासखंड देवकली, जनपद गाजीपुर।

नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप ग्रामीणों की शिकायत/कथन पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित कोटेदार और प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।