शिवपाल यादव का बड़ा ऐलान: अखिलेश यादव को CM, आजम खान को गृह मंत्री बनाना है'
ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, रामपुर. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत लगातार गरमाने लगी है। समाजवादी पार्टी ने चुनावी तैयारियों को तेज किया है। इस क्रम में अखिलेश यादव अपने पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स को धार देने में जुटे हुए हैं। अखिलेश ने दिल्ली से एफआरसीए बिल पर हमला बोला। इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ करार दिया। वहीं, पार्टी के सीनियर नेता और राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने रामपुर जिला जेल में बंद पूर्व मंत्री आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से करीब एक घंटे मुलाकात की। इसके बाद उनके घर पहुंच कर पूर्व सांसद तंजीना फातिमा और बड़े बेटे अदीब आजम से भी मिले। जौहर यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसका एक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर आया है। इसमें वे अखिलेश यादव को सीएम और आजम खान को गृह मंत्री बनाने की बात करते दिख रहे हैं।
शिवपाल यादव का जो वीडियो सामने आया है, उसमें वे एक बैठक में भाग लेते दिख रहे हैं। इस दौरान वे कहते हैं कि आजम खान के साथ जेल में बहुत बुरा सलूक हुआ है। इसलिए, इस बार इनको (भाजपा) हराना है और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाना है। अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है।
इसी दौरान कार्यक्रम में मौजूद एक व्यक्ति कहता है कि आजम भाई (आजम खान) को रक्षा मंत्री बनाना है। इस पर शिवपाल कहते हैं कि बिल्कुल बनेंगे। रक्षा मंत्री नही पहले गृह मंत्री। इसके बाद कार्यक्रम तालियों और शोर से गूंज उठता है। अब इसी वीडियो को लेकर राजनीति खूब गरमा रही है।
शिवपाल यादव ने जेल में आजम खान से मुलाकात के बाद कहा कि उनके साथ बहुत जुल्म और शोषण हुआ है। आजम खान बहुत तकलीफ में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने बड़े नेता को जमीन पर लिटाया जा रहा है। उन्हें न दवाई दी जा रही है। न ही कपड़े दिए जा रहे हैं। शिवपाल यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही आजम खान पर हुए एक-एक जुल्म और अत्याचार का बदला लिया जाएगा।
शिवपाल ने कहा कि आजम खान को प्रदेश का गृह मंत्री बनाया जाएगा। उन पर अत्याचार करने वाले अधिकारियों और षड्यंत्रकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। इसका वीडियो सामने आने के बाद चर्चा गरमा गई है कि क्या आजम खान प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद मंत्री बन सकते हैं?
दरअसल, आजम खान के खिलाफ कोर्ट ने अब तक 8 मामलों में सजा सुनाई है। इसमें से दो मामलों में उन्हें 10 साल की सजा हुई है। अगर इन सजाओं पर रोक नहीं लगती है तो आजम खान जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत सजा पूरी होने के बाद अगले 6 साल तक चुनावी राजनीति में भाग नहीं ले सकते हैं। इसका अर्थ हुआ कि वे अभी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। ऐसी स्थिति में सपा की सरकार बनने की भी स्थिति में उनके गृह मंत्री बनाने का दावा पूरा होगा या नहीं, देखना होगा।
किन मामलों में सजा:
- डूंगरपुर के एक मामले में दो साल पहले 30 मई 2024 को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) ने आजम खान को पहली बार 10 साल की सजा सुनाई थी। उन्हें घर में घुसकर लूटपाट, गाली गलौज और धमकी देने का दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई गई थी। इसमें 14 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा था।
- 13 फरवरी 2023 को मुरादाबाद की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने आजम खान और अब्दुल्ला को छजलैट में हाइवे जाम करने के मामले में दो-दो साल की सजा सुनाई थी। इस सजा के ऐलान के बाद अब्दुल्ला की विधायकी चली गई थी।
- 27 अक्टूबर 2022 को मिलक कोतवाली में दर्ज भड़काऊ भाषण के मामले में आजम को तीन साल की सजा सुनाई थी।
- 15 जुलाई 2023 को भड़काऊ भाषण के थाना शहजादनगर में दर्ज हुए मुकदमे में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने आजम खान को दो साल कैद और ढाई हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
- दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में 18 अक्टूबर 2023 को आजम खान, उनकी पत्नी पूर्व सांसद डॉ. तजीन फात्मा और बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला को सात साल कारावास की सजा हुई थी।
- 18 मार्च 2024 को डूंगरपुर प्रकरण के ही दूसरे मामले में आजम खान को सात साल कारावास की सजा सुनाई थी।
- 16 मई 2026 में आजम खान के खिलाफ एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट मजिस्ट्रेट ट्रायल ने भड़काऊ भाषण के मामले में फैसला सुनाया, जिसमें दो साल के कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
- 17 नवंबर 2025 को दो पैन कार्ड मामले में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने आजम और अब्दुल्ला को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। बाद में आजम खान की सजा को 10 साल के लिए बढ़ाया गया।
मुस्लिम वोट बैंक पर नजर
समाजवादी पार्टी की नजर मुस्लिम वोट बैंक पर है। दरअसल, प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक पर बहुजन समाज पार्टी, आजाद समाज पार्टी और एआईएमआईएम ने अपनी नजर गड़ा दी है। एआईएमआईएम लगातार मुसलमानों के मुद्दे को आक्रामक अंदाज में उठा रही है। इससे समाजवादी पार्टी के साथ एकजुट दिखने वाले मुस्लिम वोट के छिटकने का खतरा बढ़ता जा रहा है। एआईएमआईएम ने मुसलमानों के मुद्दे पर सपा नेताओं के चुप रहने का आरोप लगाया है। आजम खान के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की चुप्पी पर सवाल उठे थे।
ऐसे में अब समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता शिवपाल यादव सीधे उन्हें गृह मंत्री बनाने की बात कर मुस्लिम वोट बैंक के बीच पार्टी की पैठ को मजबूत बनाए रखने की कोशिश करते दिखे हैं। पार्टी किसी भी स्थिति में इस वर्ग को नाराज करने का जोखिम नहीं ले सकती है। पिछले दिनों में सपा के सॉफ्ट हिंदुत्व के बाद दूसरे दलों की आक्रामक रणनीति के बाद पार्टी के रुख में अब बदलाव होता दिखा है।
