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गाजीपुर में धनुष-मुकुट पूजन के साथ शुरू हुई रामलीला, 20 को होगा रावण वध

ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. गाजीपुर की अति प्राचीन हरिशंकरी रामलीला कमेटी की ऐतिहासिक चलायमान रामलीला मंगलवार शाम 7:30 बजे धनुष-मुकुट पूजन के साथ शुरू हो गई। हरिशंकरी स्थित श्रीराम चबूतरे पर विधि-विधान से पूजन के बाद 19 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ हुआ। पहले दिन नारद मोह और श्रीराम जन्म लीला का मंचन किया गया। रामलीला शुरू होते ही श्रीराम के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में लोग लीला देखने पहुंचे।
कमेटी के महामंत्री ओमप्रकाश तिवारी उर्फ बच्चा तिवारी के अनुसार, इस वर्ष भी शहर के अलग-अलग स्थानों पर भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। 6 अक्टूबर से शुरू हुई रामलीला का समापन 24 अक्टूबर को हरिशंकरी स्थित श्रीराम चबूतरे पर श्रीराम की राजगद्दी के साथ होगा।

गाजीपुर की रामलीला की सबसे बड़ी खासियत इसका चलायमान स्वरूप है। यह किसी एक मंच तक सीमित नहीं रहती। लीला के प्रसंग के अनुसार भगवान श्रीराम का रथ शहर के अलग-अलग मार्गों से होकर आगे बढ़ता है और अलग-अलग स्थानों पर रामकथा के प्रसंगों का मंचन होता है।

इस परंपरा में दर्शक किसी एक मैदान या मंच तक सीमित नहीं रहते, बल्कि श्रीराम की यात्रा के साथ चलते हुए अलग-अलग पड़ावों पर होने वाले मंचन के साक्षी बनते हैं। पुराने आयोजनों में वनगमन के दौरान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के रथ के पीछे श्रद्धालुओं की भीड़ चलने और मार्ग में भजन-कीर्तन होने का उल्लेख मिलता है।

आयोजन के कार्यक्रम के अनुसार 7 अक्टूबर को मुनि आगमन, ताड़का वध और सीताराम मिलन का मंचन होगा। 8 अक्टूबर को धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर और परशुराम-लक्ष्मण संवाद होंगे। 9 अक्टूबर को श्रीराम विवाह और कैकेयी-मंथरा संवाद तथा 10 अक्टूबर को दशरथ-कैकेयी-श्रीराम संवाद का मंचन होगा।

11 अक्टूबर को श्रीराम के वनगमन और निषादराज मिलन का प्रसंग होगा। इसके बाद केवट संवाद, भरत मनावन, अनुसुईया-सीता संवाद, जटायु प्रसंग, सीता हरण, शबरी मिलन, हनुमान-श्रीराम मिलन, सुग्रीव मित्रता और लंका दहन जैसे प्रसंग अलग-अलग स्थानों पर मंचित होंगे।

19 अक्टूबर को लक्ष्मण शक्ति तथा कुंभकरण और मेघनाद वध का मंचन होगा। 20 अक्टूबर को राम-रावण युद्ध और रावण वध के साथ लंका मैदान में रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। इसके बाद 21 अक्टूबर को भरत मिलाप, 22 अक्टूबर को अयोध्या वापसी, 23 अक्टूबर को गंगा पूजन और दशावतार की झांकी तथा 24 अक्टूबर को श्रीराम की राजगद्दी होगी।

हरिशंकरी रामलीला को आयोजकों की ओर से 400 साल से अधिक पुरानी परंपरा का हिस्सा बताया जाता है। इतने लंबे समय बाद भी इसके मंचन की मूल पहचान शहर के अलग-अलग हिस्सों में चलायमान तरीके से रामकथा का मंचन करना है।

धनुष-मुकुट पूजन के साथ मंगलवार से शुरू हुई रामलीला अगले 19 दिनों तक गाजीपुर शहर में अलग-अलग प्रसंगों के साथ जारी रहेगी। बदलते प्रसंग, बदलते स्थल और चलायमान रथ इस रामलीला की खास पहचान हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से गाजीपुर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनी हुई है।