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75 जिलों वाले उत्तर प्रदेश के सिर्फ एक जिले में दिखेगा पूर्ण सूर्यग्रहण

गाजीपुर न्यूज़ टीम, लखनऊ। देश में इस वर्ष का पहला सूर्यग्रहण रविवार यानी कल दिन में लगेगा। 75 जिलों वाले प्रदेश के सिर्फ सहारनपुर के एक कस्बा बेहट के लोग ही पूर्ण सूर्यग्रहण यानी सूर्य को छल्ले के रूप में देख सकेंगे। आषाढ़ी अमावस्या भी 21 जून को ही है। इस दिन सूर्यग्रहण होने के कारण यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो गया है। प्रदेश में सूर्य ग्रहण का काल करीब पौने चार घंटे का है। 

सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले अर्थात आज रात 10:27 बजे से प्रारम्भ हो जायेगा। इससे पहले ही सहारनपुर का बेहट कस्बा अचानक से वैज्ञानिकों में चर्चा का विषय बन गया है। यहां पर कल यानी सूर्यग्रहण के दौरान कुछ ऐसा होगा, जिससे यहां के लोग 360 वर्ष तक वंचित रहेंगे। प्रदेश में सहारनपुर का बेहट ही ऐसा क्षेत्र है जहां पर 21 जून को होने वाला वलयाकार सूर्यग्रहण पूरा दिखाई देगा। प्रदेश में छल्लेदार सूर्य सिर्फ सहारनपुर के बेहट में ही दिखाई देगा। सहारनपुर से जैसे-जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड की बढ़ेंगे सूर्य ग्रहण ग्रहण आंशिक होता जाएगा।

इसी रिंग ऑफ फायर के कारण ढेर सारे खगोल शास्त्री और वैज्ञानिक 21 जून को बेहट पहुंच रहे हैं। लखनऊ के इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला में वैज्ञानिक अधिकारी सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि जिस जगह पर पूरा वलयाकार सूर्यग्रहण या पूर्ण सूर्यग्रहण होता है। वहां दोबारा ऐसी खगोलीय घटना 360 वर्ष बाद ही होती है।

सूर्य ग्रहण के दौरान इसकी कटान सबसे ज्यादा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में में दिखेगी और सबसे कम पूर्वी उत्तर प्रदेश में दिखेगा। लखनऊ में भी 84 प्रतिशत कटा हुआ सूर्य दिखेगा। यहां पर फायर ऑफ रिंग कहीं नहीं देखने को मिलेगी। लखनऊ में सूर्यग्रहण की शुरुआत सुबह 10:17 पर हो जाएगी जो दोपहर के 2:02 तक चलेगी। यानी प्रदेश में कुल 3 घंटे 45 मिनट सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। लखनऊ में सूर्य का सबसे ज्यादा कटान दोपहर 12:11:15 से 12:12:02 तक कुल 47 सेकंड के लिए देखने को मिलेगा।

ग्रहण ने बढ़ाया आषाढ़ी अमावस्या का महत्व
हिंदू धर्म में आषाढ़ माह को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इस माह में प्रमुख रूप से भगवान विष्णु की आराधना तो की ही जाती है, शाक्त उपासकों के लिए गुप्त नवरात्रि भी इसी माह आती है। इस माह की प्रत्येक तिथि का अपना महत्व है लेकिन माह की अमावस्या और पूॢणमा विशेषकर लाभप्रद मानी गई है। इस बार आषाढ़ी अमावस्या 21 जून रविवार को है। इस दिन सूर्यग्रहण होने के कारण यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो गया है। खासकर पितृदोष, शनि दोष, कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष के निवारण के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन ग्रहण समाप्ति के बाद यदि विशेष उपाय करेंगे तो आपकी समस्याएं दूर होंगी। आषाढ़ कृष्ण अमावस्या 21 जून को खण्डग्रास सूर्य ग्रहण (चूड़ामणियोग) लगेगा जो भारत में भी दिखाई देगा।

पितरों की शांति करें 
अनजाने में यदि पितरों के प्रति कोई अपमान हो जाता है या उनके उत्तरकार्य ठीक से नहीं हो पाते हैं तो पितृ असंतुष्ट रह जाते हैं। ऐसे में उनके वंशजों के जीवन में अनेक प्रकार की परेशानियां आने लगती हैं, खासकर आॢथक संकट, रोजगार का संकट, रोग और संतान प्राप्ति में कठिनाई आदि आती है। पितृ दोष की शांति के लिए अमावस्या का दिन तय है क्योंकि अमावस्या पितरों की तिथि मानी गई है। इस दिन अतृप्त पितृ अपने परिजनों से कुछ पाने की आशा में पृथ्वी पर आते हैं। अमावस्या के दिन यदि पितरों के निमित्त तर्पण, पिंड दान, अन्न् दान, धूप आदि कर्म किए जाएं तो इससे पितृ प्रसन्न् होते हैं और परिवार में उनके आशीर्वाद से खुशहाली आती है। इस दिन भगवान शिव का दूध से अभिषेक करने और गरीबों को दूध पिलाने या खीर खिलाने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है।

चार राशि वालों को लाभ

कंकणाकृति सूर्य ग्रहण चार वालों की किस्मत खोल देगा।

कालसर्प दोष शांति की पूजा
इस दिन कालसर्प दोष की शांति करें। अमावस्या का दिन कालसर्प दोष की शांति का सबसे अचूक दिन होता है। कालसर्प दोष निवारण के लिए सुबह स्नान के बाद चांदी से निॢमत नाग-नागिन की विधिवत पूजा करवाएं। सफेद पुष्प के साथ इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। कालसर्प दोष से राहत पाने का यह अचूक उपाय है। इस दिन 8 नारियल पर सिंदूर से नाग-नागिन का जोड़ा बनाकर दो-दो नारियल को मौली से बांधकर कालसर्प दोष वाले व्यक्ति के हाथ से जल में प्रवाहित करवाने से दोष की शांति होती है।

शनि की शांति करें
अमावस्या तिथि शनि दोष की शांति के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। जिन लोगों को शनि की साढ़ेसाती या लघु ढैया चल रहा है (वर्तमान में धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है और मिथुन और तुला राशि पर लघु ढैया चल रहा है।) वह लोग आषाढ़ी अमावस्या के दिन शनिदेव का तैलाभिषेक करें और भूखे प्राणियों को भोजन कराएं। गरीबों को मीठे चावल खिलाने से शनि दोष की शांति होती है।

आषाढ़ी अमावस्या पर आजमायें
अमावस्या के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। किसी तालाब या नदी किनारे जाकर ये आटे की गोलियां मछलियों को खिला दें। इस उपाय से आपके जीवन की अनेक परेशानियों का अंत हो सकता है। इस दिन काली चींटियों को शकर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप कर्मों का क्षय होगा और पुण्य-कर्म उदय होंगे। यही पुण्य कर्म आपकी मनोकामना पूॢत में सहायक होंगे। यदि आपकी नौकरी नहीं लग पा रही है तो अमावस्या के दिन एक नीबू को गंगाजल से धोकर सुबह अपने घर के मंदिर में रख दें। फिर रात के समय इसे सात बार अपने ऊपर से घड़ी की सुई की दिशा में घुमाकर इसके चार बराबर भाग कर लें और किसी चौराहे पर जाकर चारों दिशाओं में फेंक दे। वापस घर आ जाएं और मुड़कर पीछे न देखें।

अमावस्या को सायंकाल घर के ईशान कोण में पूजा वाले स्थान पर गाय के घी का दीपक लगाने से धन संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। धन प्राप्ति का एक अचूक टोटका कई तांत्रिक ग्रंथों में बताया गया है। अमावस्या की रात्रि को पांच लाल फूल और पांच जलते हुए दीये बहती नदी में प्रवाहित करें। इससे धन प्राप्ति के प्रबल योग बनेंगे। आषाढ़ी अमावस्या के दिन रात में दस बजे के बाद एकांत में बैठकर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से शत्रुओं का नाश होता है, साहस में वृद्धि होती है।